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Message From The Head

संदेश

मानव जीवन को विकसित करने के लिए शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा यह देश अपने हजारों साल की संस्कृति को संजोकर , भविष्य में दुनिया के विकसित देशों के व्यक्तियों के साथ कदम से कदम मिला कर चल सकेगा । 21वीं शताब्दी में मानव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के द्वारा, ऐसी क्रांति ला रहा है, जो कल्पना से परे है, और मानव का दायरा इस संसार तक ही सीमित न रह कर बाह्य जगत से जुड़ रहा है।

हमारा निश्चय है कि, हम विद्यार्थियों को उत्तम शिक्षा केन्द्र प्रदान करें । जो उन्हे आर्थिक रूप  से सक्षम व स्वावलम्बी भारतीय नागरिक  के रूप  में सुसज्जित करे।  यह संस्थान ऐसा हो जो उत्तम शैक्षिणिक आधारभूत संरचना एवं सर्वश्रेष्ठ संकाय के द्वारा छात्रों के ज्ञानोपर्जन के साथ अनुशासन एवं चरित्र निर्माण में सहयोग प्रदान करे , एवं अध्यापकगण छात्र एवं छात्राएं इस शताब्दी के महायज्ञ में कदम से कदम मिला कर बढ़ें , तथा अपने देश को अपने समय में ही विकसित देश के रूप में देखें।

गांधी जी के अनुसार , शिक्षा के द्वारा ही बालक एवं बालिकाओं में निहित गुणों का सर्वांगीण विकास होता है, शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य में विनम्रता आती है ।

संस्कृत के एक श्लोक के अनुसार ,’’

विद्या ददाति विनयम् विनयाद् याति पात्रताम्।

पात्रत्वाद् धनमाप्नोति धनाद्वर्म ततः सुखम्।।

शिक्षा को प्राप्त कर लेने से मनुष्य को सभी प्रकारों के सुख की प्राप्ति हो जाती है । बच्चों की शिक्षा में परिवार एवं  स्कूल दोनों का उत्तरदायित्व है। स्कूल में शिक्षक, शिक्षिकाए एवं घर में अभिभावक दोनों ही मिल कर सहयोंग दे सकते हैं। बालक एवं बालिका एक पुस्तक के समान है जिसे शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को पृष्ठ दर पृष्ठ भलीभांति पढ़ना चाहिए । 

श्ब्ीपसक पे ं इववा ूीपबी ींे जव इम तमंक तिवउ चंहम जव चंहमण्श्


श्री धीरेन्द्र नाथ मिश्र 

   प्रबन्धक